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150 रुपये वाली बीयर पर कितना टैक्स? जानिए

150 रुपये वाली बीयर पर कितना टैक्स? जानिए

अगर आप 150 रुपये की बीयर खरीदते हैं, तो जान लीजिए कि इसका असली दाम बहुत कम होता है। इसमें करीब 60 से 70 रुपये तो सीधे सरकार एक्साइज ड्यूटी और वैट के नाम पर ले जाती है। बाकी बचे पैसों में कंपनी की लागत, डिस्ट्रीब्यूटर का मुनाफा और दुकानदार का कमीशन शामिल होता है।

द्रौपदी ने 5 पतियों के बीच ऐसे बांटा था समय, पांडवों ने उम्रभर निभाया ये अनुशासन

द्रौपदी ने 5 पतियों के बीच ऐसे बांटा था समय, पांडवों ने उम्रभर निभाया ये अनुशासन

महाभारत के अनुसार, द्रौपदी और पांचों पांडवों के बीच गृहस्थी चलाने के लिए नारद मुनि की सलाह पर एक सख्त नियम बना था। इसके तहत द्रौपदी हर पांडव के साथ एक-एक वर्ष का समय बिताती थीं। नियम इतना कड़ा था कि यदि कोई भाई दूसरे के समय में कक्ष में प्रवेश करता, तो उसे 12 वर्ष का वनवास भोगना पड़ता था।

News Source: न्यूज़ 18
बुध प्रदोष व्रत में भूलकर भी न करें ये गलतियां: धन और व्यापार में उन्नति के लिए जरूरी

बुध प्रदोष व्रत में भूलकर भी न करें ये गलतियां: धन और व्यापार में उन्नति के लिए जरूरी

आज (17 दिसंबर 2025) साल का आखिरी बुध प्रदोष व्रत है, जो धन और व्यापार बढ़ाने का दुर्लभ संयोग है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन पूजा में कुछ खास गलतियां करने से बचना चाहिए। खासकर प्रदोष काल में शिवजी की आराधना करते समय साफ-सफाई और व्रत के नियमों का पालन करें, ताकि शिवजी की कृपा से तरक्की के मार्ग खुलें।

साँप का ज़हर! जानिए अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एक लीटर ज़हर की कीमत क्या है

साँप का ज़हर! जानिए अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एक लीटर ज़हर की कीमत क्या है

साँपों का ज़हर (Venom) दवाइयाँ बनाने में इस्तेमाल होने के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बहुत महंगा बिकता है। ज़हर की किस्म के आधार पर इसकी कीमत लाखों से करोड़ों रुपये प्रति लीटर तक हो सकती है। कोबरा और वाइपर जैसी खतरनाक प्रजातियों के ज़हर की मांग सबसे ज्यादा होती है, क्योंकि यह जीवन रक्षक एंटी-वेनम और रिसर्च में उपयोगी है।

News Source: @ChoteNews रिसर्च
ऐसे चेक करे ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम

ऐसे चेक करे ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम

मतदान करना हर किसी का हक़ होता है, लेकिन सवाल यह है कि आपका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में है या नहीं। फ़िलहाल पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, गोवा, राजस्थान और लक्षद्वीप की ड्राफ्ट लिस्ट जारी हो चुकी है। अगर आप खुद का नाम चेक करना चाहते है तो ऑनलाइन ईसीआई की वेबसाइट या मोबाइल एप से चेक कर सकते है।

घर के मुख्य दरवाजे पर क्यों लगाई जाती है घोड़े की नाल?

घर के मुख्य दरवाजे पर क्यों लगाई जाती है घोड़े की नाल?

वास्तु शास्त्र और लोक मान्यताओं में घोड़े की नाल को बहुत शुभ माना जाता है, इससे घर में कभी भी नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करती है। साथ ही अगर आपके घर में बार-बार बाधाएं आ रही हैं या नुकसान हो रहे हैं तो घोड़े की नाल जरूर लगानी चाहिए। इसे लगाने के लिए शनिवार या अमावस्या का दिन सही माना जाता है। नाल लगाते समय शनि मंत्र का जाप करें।

पैदा होने के बाद बच्चा रोता क्यों हैं, हंसता क्यों नहीं? जानें

पैदा होने के बाद बच्चा रोता क्यों हैं, हंसता क्यों नहीं? जानें

जन्म के बाद बच्चे का पहला रोना, तकलीफ नहीं, बल्कि नई दुनिया में उसके अस्तित्व की पहली मुहर होता है। गर्भ से बाहर आते ही, ठंडा तापमान और तेज रोशनी बच्चे को शॉक देती है। यह रोना ही बताता है कि बच्चे ने पहली बार बाहरी हवा ली है, जिससे उसके फेफड़े सक्रिय हुए हैं और शरीर नए माहौल से तालमेल बिठा रहा है।

चीन में ड्रैगन को इतना खास क्यों मानते है?

चीन में ड्रैगन को इतना खास क्यों मानते है?

चीनी संस्कृति में ड्रैगन को बहुत पवित्र, शुभ और काफी ज्यादा सम्मानित प्रतीक मानते है। उनके अनुसार ड्रैगन विनाश के बजाय आशीर्वाद लाते है। यह एक जीव पर आधारित नहीं है, यह नौ अलग-अलग जानवरो का मिलन है। जिसमे हिरण के सींग, ऊंट का सिर, खरगोश की आंखें, सांप की गर्दन, मछली के शल्क, चील के पंजे और बैल के कान शामिल हैं।

किसानों के लिए ज़रूरी खबर! चने की फसल को रोग से बचाने के लिए अपनाएं ये शानदार तरीके

किसानों के लिए ज़रूरी खबर! चने की फसल को रोग से बचाने के लिए अपनाएं ये शानदार तरीके

किसान भाई ध्यान दें! रबी सीजन में चने की फसल को ‘सूखा जड़ गलन’ (Dry Root Rot) रोग से बचाना बहुत ज़रूरी है। इस बीमारी से बचने के लिए किसान फसल बोने से पहले बीजों का उपचार करें और खेत में पानी के सही निकास का ध्यान रखें। ये छोटे से टिप्स आपकी फसल का बंपर उत्पादन सुनिश्चित करेंगे।

बच्चों की सही परवरिश के लिए ‘को-पैरेंटिंग’ है ज़रूरी

बच्चों की सही परवरिश के लिए ‘को-पैरेंटिंग’ है ज़रूरी

विशेषज्ञों ने बच्चों की बेहतर परवरिश के लिए ‘को-पैरेंटिंग’ के महत्व पर ज़ोर दिया है। उनका कहना है कि तलाक या अलग होने के बाद भी माता-पिता को बच्चों की देखभाल और भविष्य के फैसले मिलकर लेने चाहिए। बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए यह ज़रूरी है कि उन्हें दोनों माता-पिता का सहयोग मिले।

News Source: @ChoteNews रिसर्च
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