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GK Quiz: जानते हैं किस मसाले को कहा जाता है ‘लाल सोना’?

GK Quiz: जानते हैं किस मसाले को कहा जाता है ‘लाल सोना’?

दुनिया में एक ऐसा मसाला भी है जिसकी कीमत सोने के भाव को टक्कर देती है और इसीलिए इसे ‘लाल सोना’ कहा जाता है। हम बात कर रहे हैं केसर की, जिसकी खेती बेहद कठिन होती है और इसके हजारों फूलों से सिर्फ चंद ग्राम केसर ही निकल पाता है। अपनी खुशबू और गुणों के कारण यह दुनिया का सबसे महंगा मसाला बना हुआ है।

News Source: न्यूज़ 18
बुर्ज खलीफा की गजब कहानी: न आसमानी बिजली का डर, न तूफान का असर

बुर्ज खलीफा की गजब कहानी: न आसमानी बिजली का डर, न तूफान का असर

बुर्ज खलीफा सिर्फ ऊंची बिल्डिंग नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग का अजूबा है। इसे खास ‘Y’ शेप में बनाया गया है ताकि तेज हवाएं इसे हिला न सकें। रही बात आसमानी बिजली की, तो इसके लिए जबरदस्त अर्थिंग सिस्टम लगा है जो बिजली को सोखकर सीधे जमीन में भेज देता है। तूफानों के बीच ये गगनचुंबी इमारत आज भी सीना तानकर खड़ी है।

News Source: न्यूज़ 18
पुराना स्विच बोर्ड चमकाने का सबसे आसान तरीका

पुराना स्विच बोर्ड चमकाने का सबसे आसान तरीका

आजकल घरों में स्विच बोर्ड को साफ करना काफी मुश्किल होता है। इसे साफ करने के लिए आप शेविंग क्रीम, मिट्टी का तेल या नेल पॉलिश रिमूवर का इस्तेमाल कर सकते हैं। बस कपड़े को हल्का सा गीला करें ताकि करंट का खतरा न रहे। इन चीजों के उपयोग से बोर्ड बिल्कुल नया जैसा चमकने लगेगा।

प्लास्टिक या कांच? नारियल तेल रखने के लिए कौन सा डिब्बा है बेस्ट

प्लास्टिक या कांच? नारियल तेल रखने के लिए कौन सा डिब्बा है बेस्ट

नारियल तेल को प्लास्टिक की बोतल में रखना बंद करो क्योंकि धूप और गर्मी से प्लास्टिक के केमिकल तेल में घुलकर उसे खराब कर देते हैं। तेल की खुशबू और शुद्धता बचाए रखनी है, तो कांच का जार ही सबसे बेस्ट है। कांच में रखा तेल लंबे समय तक ताजा रहता है और सेहत को भी कोई नुकसान नहीं पहुँचता।

World Saree Day: जब साड़ी नहीं थी तब क्या पहनती थीं महिलाएं?

World Saree Day: जब साड़ी नहीं थी तब क्या पहनती थीं महिलाएं?

आज भले ही साड़ी भारत की पहचान हो, लेकिन पुराने जमाने में औरतें साड़ी नहीं बल्कि ‘नीवी’ और ‘स्तनपट्ट’ जैसे बिना सिले कपड़े पहनती थीं। सिंधु घाटी सभ्यता और वैदिक काल में शरीर के ऊपरी और निचले हिस्से को ढकने के लिए अलग-अलग कपड़ों का चलन था। धीरे-धीरे इन्हीं लिबासों ने लंबा रूप लिया और आज की शानदार साड़ी का जन्म हुआ।

हिजाब विवाद के बीच समझें इस्लाम में इसका असली मतलब और क्या हैं जरूरी नियम!

हिजाब विवाद के बीच समझें इस्लाम में इसका असली मतलब और क्या हैं जरूरी नियम!

नीतीश कुमार के बयान से छिड़ी हिजाब वाली बहस के बीच लोग इसके कायदे-कानून तलाश रहे हैं। दरअसल, इस्लाम में हिजाब का मतलब सिर्फ सिर ढंकना नहीं, बल्कि शालीनता और पर्दा है। कुरान के मुताबिक, यह महिलाओं की सुरक्षा और पहचान के लिए है, जिसमें चेहरा और हाथ छोड़कर शरीर को ढंकने की बात कही गई है।

साल की आखिरी एकादशी पर बन रहा है दुर्लभ संयोग, संतान सुख के लिए करें ये खास उपाय!

साल की आखिरी एकादशी पर बन रहा है दुर्लभ संयोग, संतान सुख के लिए करें ये खास उपाय!

साल की आखिरी पौष पुत्रदा एकादशी पर इस बार ग्रहों का ऐसा अद्भुत मेल बैठ रहा है, जो संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वालों के लिए वरदान साबित होगा। 30 दिसम्बर को श्रद्धा भाव से व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में किलकारियां गूंज सकती हैं। बस सच्चे मन से हरि नाम जपें, बिगड़े काम भी बन जाएंगे।

मुर्गे-मुर्गियों को खिलाएं ये ‘हरा चारा’, अंडों की पैदावार होगी दोगुनी

मुर्गे-मुर्गियों को खिलाएं ये ‘हरा चारा’, अंडों की पैदावार होगी दोगुनी

मुर्गी पालन करने वाले भाइयों के लिए अजोला किसी वरदान से कम नहीं है। इस पौष्टिक हरी घास को खिलाने से मुर्गियों की सेहत सुधरती है और अंडों का उत्पादन जबरदस्त बढ़ जाता है। सबसे बड़ी बात ये है कि इससे दाने का खर्च आधा हो जाता है और कमाई बढ़िया होती है। कम लागत में मुनाफे का सॉलिड फॉर्मूला है।

कड़कड़ाती ठंड में चाहिए सुकून की नींद? कंबल चुनते समय बस इन 3 बातों का रखें ख्याल

कड़कड़ाती ठंड में चाहिए सुकून की नींद? कंबल चुनते समय बस इन 3 बातों का रखें ख्याल

सर्दी का सितम जारी है, ऐसे में सही कंबल चुनना किसी टास्क से कम नहीं। अच्छी नींद के लिए हमेशा ऊनी या फ्लीस वाले हल्के और हवादार कंबल ही लें। ध्यान रहे कि कपड़ा स्किन के लिए आरामदायक हो और गर्मी बरकरार रखे। भारी-भरकम कंबल के बजाय क्वालिटी पर फोकस करें ताकि नींद में खलल न पड़े और आप फिट रहें।

आखिर बच्चों के दांत किस उम्र में निकलने लगते हैं?

आखिर बच्चों के दांत किस उम्र में निकलने लगते हैं?

माता-पिता के लिए अपने बच्चें के साथ बिताया हर पल यादगार होता है। ऐसे में बच्चों के दांत 6 महीने में निकलना शुरू हो जाते है। 12वें महीने में उसके 3 से 4 दांत निकल आते है। 3 साल की उम्र में बच्चें के 20 दूध के दांत निकल आते है। लड़कियों के दांत लड़को की तुलना में जल्दी निकल आते है।

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